टेरेस का फूल

टेरेस का फूल

अरे सुनो !
कहाँ हो आजकल, दिखते नहीं !
याद हूँ मै?
या पहचानते नहीं !

दिन बहुत हो गए तुम्हे देखे
कैसे दीखते हो अब
मै तो वैसा ही हूँ
तुम कैसे हो अब !

कल यहाँ बारिश हुई थी
और मै भीगा था
तुम भी भीगे थे !
या अब नहीं भीगते ?

तुम्हारे हाथ से जब पानी पाता था
आनंद उसका अलग आता था
अब तो बस भीग लेता हूँ
पर प्यास नहीं बुझती

पहचाने ?
मै ही तो हूँ
तुम्हारे टेरेस का वो फूल ही तो हूँ !

मै तो आज भी खिलता हूँ
देखने को
की तुम आये तो नहीं !
रोज मुरझा जाता हूँ
पर तुम दिखते तो नही!

हाँ सुनो !
अब वो नन्ही दोस्त भी नहीं आती
चहचहाने की वो आवाज नहीं आती
याद आया ?
हाँ ! वो गौरैया , वही !

कटोरे का पानी सूख गया होगा, शायद
या अब आशियाना बदल लिया होगा, शायद !
बहरहाल !
रोज खिलता हूँ इस ख्याल से
की कभी तो आओगे, शायद !
प्यार से मुझे सहलाओगे, शायद !

आखिर में
एक और खबर देनी थी तुम्हे
दस्तूर
चले जाने का, देना था तुम्हे
सब कुछ तो था
फिर भी सूख गया
वो काटो वाला फूल, मेरा पडोसी !
अब नहीं रहा !

Comments

  1. Dil ko Chu jaane wali baat.. Kalam se nikali Apne...
    Kya khoob likha.. !!
    Behtareen!!!!

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    Replies
    1. अपने आवाज की लरजिश पे तो काबू पा ले
      प्यार के बोल तो होठो से निकल जाते हैं

      Delete
  2. Bahut khub.
    ➕➕🅰🅰🅰➕➕
    🍀🍀😊😊😊🍀🍀
    📖📖🙏🙏🙏📖📖

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