वो चले गए

इस तरह मै जिंदगी से हारा हूँ
की अपनी ही नज़र में बना बेचारा हूँ
हर चीज मुह चिढाती सी लगती है
जिंदगी यूँ खार खायी सी लगती है
आँख में आंसू दिल में गम और जुबान बेजबान है
बदकिस्मती पूरी किस्मत से मेहरबान है
एक सवाल मुझे यूँ परेशान करता है
तड़पाता है और हैरान करता है
जब वो चले गए तो उनकी याद क्यूँ आती है
सूनी शाम आँख क्यूँ भर जाती है
क्यों अब अपने कपड़ो में चमक नहीं देखना चाहता
ये चेहरा मेरा कोई रौनक नहीं देना चाहता
बिस्तर पे खुद को तड़पते पाता हूँ
ज्यों किसी का क़र्ज़ मै चुकाता हूँ
मै जानता हूँ की तुम लौट के नहीं आवोगी
दूर कही किसी और के बाँहों में खो जावोगी
हर शाम अब उदास होता है
हाथ मलता हुवा सा अहसास होता है
हंसी छिन गयी उदास रातो का अब सहारा हूँ
इस इस तरह मै जिंदगी से हारा हूँ

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