मेरी बिटिया

तुम जानती हो कौन हो ! 
तुम हो हवा, तुम हो घटा 
तुम सृष्टि का वरदान हो 
तुम कल भी थे तुम आज हो 
तुम ही तो मेरा मान हो 
तुम रक्त हो तुम साँस हो 
तुम आस हो विश्वास हो 
तुम हो मेरा चातुर्य भी 
तुम ही तो मेरा मौन हो 
तुम जानती हो कौन हो ! 

तुम में विगत, आगत में तुम 
तुम अश्रु में , स्वागत में तुम 
तुम हो बसंत, बहार हो 
 सावन की पहली फुहार हो 
तुम से है जग चंचल बना 
तुम बिन मैं शोकाकुल बना 
तुम काल का हर पल बनी 
तुम ही तो मेरा आन हो 
तुम जानती हो कौन हो ! 

तुम हो झलक भविष्य की 
तुम काल का परिदृश्य हो 
तुम यत्र हो तुम तत्र हो 
तुम ही हो हाँ सर्वत्र हो 
तुम नीर सी कोमल जो हो 
तो लौह सी हो सख़्त भी 
तुम स्वर्ण हो सम्पत्ति 
हो आगत की तुम सिरमौर 
हो तुम जानती हो कौन हो ! 

तुम बन सको जो तो बनो 
तुम अग्नि का पर्याय हो 
तुम ढल सको जो तो ढलो 
ज्यों म्यान का तलवार हो 
दुर्बल की शक्ति तुम बनो तो 
ज्ञान की साक्षात् भी 
मेघा सी क्षमतावान हो 
और वृष्टि सी घनघोर हो 
तुम जानती हो कौन हो !

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