युवा

रोती हुयी जिंदगी, हसते हुए लोग जी रहे हैं, हंस रहे हैं, एक दूसरे पर किन्तु क्या कोई हँसता है, रोता है स्वयं पर, जैसे मै दम तोड़ती महत्वाकांछा चाहू ओर घिरता तम विकट खोज, जाने कहा छुप गया है प्रकाश पुंज जिंदगी का कहा तक करूँ संघर्ष? टूटता आत्मविश्वास, टूटती हिम्मत टूटता दम हूँ दिग्भ्रमित भयंकर क्यों? हारती हुयी कोशिश लौटती हुयी आवाज़े बोझिल साँसे बढ़ता कर्ज अवरुद्ध विचार क्यों हो रहा है अविभाजित मन स्वयं से? याद आते गुरु जी के आशीर्वाद माँ की ममता पिता की उम्मीद याद आते स्वप्न जो इन्ही आँखों से देखे किन्तु अब नहीं दिखते बिलखता अतीत लुटता सर्वस्व फिर भी मै कर रहा प्रयास प्रयास !! यही तो है जो मै कर सकता हूँ और शायद कुछ नहीं.

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