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Showing posts from June, 2022

मै और मेरी कलम

दिन गिने चुने मैं क्या बोलूँ  जीवन के खाते मिलती है क्या रंग बताऊँ जीवन का  पग पग पर रंग बदलती है  लिखती है क़लम मेरी सब कुछ  पर तू मुझे कभी नहीं लिखती है ।   मैं हूँ कैसा, मैं हूँ किसका  सारांश मेरा किसके जैसा  मेरा अंत है क्या, प्रारब्ध कहाँ ?  जीवन में मुझको लब्ध है  क्या जीवन में खोया पाया क्या  ये खाता ही लिख डाल कभी  कितने जोड़े कितने छूटे  क्या अपने हैं ये लोग सभी  कुछ बोल तो क्या तू कहती है  तू मुझे कभी नहीं लिखती है ।   लिख डाल हुनर मेरा है क्या  या घुला ज़हर जीवन में क्या  लिख- दिया है क्या अब तक मैंने  या पिया ज़हर कितना मैंने  मुझ पर कितना है क़र्ज़ चढ़ा  और कितना मेरा मर्ज़ बड़ा  कितना सच्चा कितना झूठा  और कितना मेरा दर्प बढ़ा  लिख मुझको जितना सुनती है  तू मुझे कभी नहीं लिखती है  कितना है सच जो बुनता मैं  है स्वप्न या मिथ्या मनतरंग  कुछ बदला मैंने ग़लत कहीं  या रह गया बन के इक उमंग  है साथ मेरे संगी कोई  या बस मतलब की यारी है...

मेरी बिटिया

तुम जानती हो कौन हो !  तुम हो हवा, तुम हो घटा  तुम सृष्टि का वरदान हो  तुम कल भी थे तुम आज हो  तुम ही तो मेरा मान हो  तुम रक्त हो तुम साँस हो  तुम आस हो विश्वास हो  तुम हो मेरा चातुर्य भी  तुम ही तो मेरा मौन हो  तुम जानती हो कौन हो !  तुम में विगत, आगत में तुम  तुम अश्रु में , स्वागत में तुम  तुम हो बसंत, बहार हो   सावन की पहली फुहार हो  तुम से है जग चंचल बना  तुम बिन मैं शोकाकुल बना  तुम काल का हर पल बनी  तुम ही तो मेरा आन हो  तुम जानती हो कौन हो !  तुम हो झलक भविष्य की  तुम काल का परिदृश्य हो  तुम यत्र हो तुम तत्र हो  तुम ही हो हाँ सर्वत्र हो  तुम नीर सी कोमल जो हो  तो लौह सी हो सख़्त भी  तुम स्वर्ण हो सम्पत्ति  हो आगत की तुम सिरमौर  हो तुम जानती हो कौन हो !  तुम बन सको जो तो बनो  तुम अग्नि का पर्याय हो  तुम ढल सको जो तो ढलो  ज्यों म्यान का तलवार हो  दुर्बल की शक्ति तुम बनो तो  ज्ञान की साक्षात् भी  मेघा सी क...