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सन्नाटा

क्यों हो जाता है कोई मौन? क्यों होता है सन्नाटा ? क्यों लगता कष्टदायीं जीवन? जब टूटते हैं सपने शीशे की भाँति जब बिखरते है सपने जीवन के जैसे बिखरते हैं टुकड़े शीशे के क्या हो सारांश स्वप्न का? बनना, टूटना, पूरा होना या कुछ और! इतिवृत्ति तो है टूटने के बहरहाल ! शीशे की सी चमक होती है स्वप्न में जब कि सुना है यथार्थ सपनो का शीशे से साफ़ दिखता है किंतु है कुछ अंतर शीशे में और स्वप्न में चमकता है शीशा, टूटने के बाद भी कई रूपों में, कई हिस्सों में वही चमक जो पहले थी टूटे जबकि दोनो एक बात और क्या बिक सकते हैं टूटे सपने में? जैसे बिकते टूटे शीशे क्यों नहीं करता है मानव ऐसा कोई एक उपक्रम जिस से बन सके फिर से टूटे सपने नहीं ना ! फिर कैसा संताप ? कैसा विलाप? कैसा मौन और कैसा सन्नाटा ? स्वप्न टूटे या काँच नहीं टूटेंगे तो कहाँ से होगा पुनर्निर्माण? आवश्यक है स्वप्न पुनर्निर्माण के लिए जैसे आवश्यक है किरण मिटाने को अंधेरे का अस्तित्व क्यों होता है सन्नाटा ? जब आती है आवाज़ टूटने की ? यदि ज़रूरी है पुनर्निर्माण तो बाँटे हम सन्ना...